पंचांग · अपने शहर के अनुसार
आज का पंचांग
पूरा पंचांग
किसी भी तारीख़ और समय का पंचांग
ऊपर तारीख़ और समय बदलकर देखिए — पंचांग उसी क्षण का निकल आएगा। आगे का भी, पीछे का भी।
सबसे ज़्यादा काम यह एक जगह आता है: जन्म के समय का नक्षत्र। अपनी जन्म तिथि, जन्म का समय और जन्म का शहर डाल दीजिए — उस क्षण की तिथि, नक्षत्र, योग, करण और चंद्र राशि सामने आ जाएगी।
यहाँ एक बात ध्यान रखने की है। जन्म का समय जितना सही होगा, नक्षत्र उतना ही भरोसेमंद होगा। नक्षत्र लगभग हर 24 घंटे में बदलता है, पर अगर जन्म उसी समय के आसपास हुआ जब नक्षत्र बदल रहा था, तो आधे घंटे का फ़र्क़ भी नक्षत्र बदल देगा। इसलिए अस्पताल के रिकॉर्ड या जन्म प्रमाणपत्र का समय ही लीजिए, याद किया हुआ अनुमान नहीं।
और यह दोहरा देना ज़रूरी है — यह आपको आँकड़ा देता है, कुंडली नहीं। कुंडली में ग्रहों की स्थिति, भाव, दशा और बहुत कुछ लगता है। यह उसका एक हिस्सा है, पूरा नहीं।
कौन सी चीज़ शहर से बदलती है, कौन सी नहीं
यह भेद समझ लेना ज़रूरी है, क्योंकि इसी पर आधा भ्रम टिका है।
| तत्व | शहर से बदलता है? | कारण |
|---|---|---|
| तिथि, नक्षत्र, योग, करण | नहीं | ये आकाश की स्थिति हैं — एक ही क्षण में सब जगह एक। बस आपकी घड़ी का समय अलग दिखेगा |
| सूर्योदय, सूर्यास्त | हाँ | हर देशांतर पर सूर्य अलग समय पर उगता है |
| राहुकाल, गुलिक, यमगंड | हाँ | ये सूर्योदय से नापे जाते हैं |
| अभिजित मुहूर्त | हाँ | दिन के ठीक मध्य से निकलता है |
इसीलिए जो साइट आपसे शहर नहीं पूछती, वह राहुकाल का सही समय नहीं दे सकती — चाहे कितनी भी बड़ी हो।
राहुकाल निकलता कैसे है
इसमें कोई रहस्य नहीं, सीधा गणित है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटिए। हर वार के लिए एक भाग तय है:
| वार | रवि | सोम | मंगल | बुध | गुरु | शुक्र | शनि |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भाग | 8वाँ | 2रा | 7वाँ | 5वाँ | 6ठा | 4था | 3रा |
चूँकि दिन की लंबाई हर शहर और हर मौसम में बदलती है, आठवाँ हिस्सा भी बदलता है। गर्मियों में राहुकाल लंबा होता है, सर्दियों में छोटा — यह अपने आप निकलता है, किसी तालिका से नहीं।
यह क्या नहीं करता
यह साफ़ कह देना ज़रूरी है।
यह उपकरण पंचांग के आँकड़े देता है — वही आधार-सामग्री जिस पर पुरोहित और ज्योतिषी काम करते हैं। यह निर्णय नहीं देता।
विवाह, गृह प्रवेश या नामकरण का मुहूर्त केवल पंचांग से तय नहीं होता। उसमें वर-वधू की जन्म कुंडली, गुण मिलान, ग्रहों की दशा और कई अन्य नियम लगते हैं। जो वेबसाइट सिर्फ़ तिथि देखकर कहे कि "यह आपके विवाह के लिए शुभ है", वह आपको अधूरी बात बता रही है।
इसलिए यहाँ आपको वह सब मिलेगा जो गणना से निकलता है, और उससे आगे का फ़ैसला आपके पुरोहित का है। इसे आप ऐसे भी देख सकते हैं — यह तराज़ू है, वैद्य नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आज का नक्षत्र कौन सा है?
ऊपर अपना शहर चुनिए — उसी समय का नक्षत्र, वह कब तक है और उसके बाद कौन सा आएगा, तीनों दिख जाएँगे। नक्षत्र चंद्रमा की स्थिति से तय होता है और लगभग हर 24 घंटे में बदलता है, इसलिए समय के साथ देखना ज़रूरी है।
पंचांग शहर के हिसाब से क्यों बदलता है?
तिथि, नक्षत्र, योग और करण पूरी पृथ्वी पर एक ही क्षण में एक जैसे होते हैं — बस आपके घड़ी के समय में अलग दिखते हैं। लेकिन सूर्योदय, सूर्यास्त, राहुकाल, गुलिक, यमगंड और अभिजित मुहूर्त पूरी तरह स्थान पर निर्भर हैं, क्योंकि ये सूर्योदय से नापे जाते हैं। इसीलिए शहर चुनना ज़रूरी है।
राहुकाल कैसे निकाला जाता है?
सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है, और हर वार के लिए एक निश्चित भाग राहुकाल कहलाता है — रविवार को आठवाँ, सोमवार को दूसरा, मंगलवार को सातवाँ, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, शुक्रवार को चौथा और शनिवार को तीसरा। चूँकि यह सूर्योदय से बँधा है, हर शहर में इसका समय अलग होता है।
यह गणना कितनी सही है?
गणना खगोलीय सूत्रों से होती है, किसी तैयार तालिका से नहीं। इसे प्रचलित पंचांग स्रोतों से मिलाकर जाँचा गया है — नक्षत्र, योग, करण और राशि के नाम पूरी तरह मिलते हैं, और समय एक से तीन मिनट के भीतर रहता है। सूर्योदय-सूर्यास्त खगोलीय मानक (वायुमंडलीय अपवर्तन सहित) से निकाले जाते हैं।
क्या इससे विवाह या गृह प्रवेश का मुहूर्त निकाला जा सकता है?
नहीं। यह पंचांग के आँकड़े देता है, निर्णय नहीं। विवाह जैसे कार्यों का मुहूर्त वर-वधू की जन्म कुंडली, गुण मिलान और कई अन्य नियमों पर निर्भर करता है — वह केवल पंचांग से तय नहीं होता। उसके लिए अपने पुरोहित या ज्योतिषी से ही परामर्श कीजिए। यहाँ आपको वही आधार-सामग्री मिलेगी जिस पर वे काम करते हैं।
अभिजित मुहूर्त क्या है?
दिन के ठीक मध्य में, दोपहर के आसपास का लगभग 48 मिनट का समय अभिजित मुहूर्त कहलाता है। परंपरा में इसे सामान्य शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। यह भी सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच से निकलता है, इसलिए हर शहर में अलग होता है।
तिथि और नक्षत्र में क्या अंतर है?
तिथि चंद्रमा और सूर्य के बीच का कोण है — हर 12 डिग्री पर एक तिथि। नक्षत्र केवल चंद्रमा की स्थिति है — आकाश को 27 भागों में बाँटकर देखा जाता है कि चंद्रमा किस भाग में है। तिथि दोनों से बनती है, नक्षत्र अकेले चंद्रमा से।
बड़े शहरों के पंचांग पृष्ठ
- लखनऊ
- दिल्ली
- मुंबई
- कोलकाता
- चेन्नई
- बेंगलुरु
- हैदराबाद
- अहमदाबाद
- पुणे
- जयपुर
- वाराणसी
- प्रयागराज
- सभी शहर और कैलेंडर →
अपना जन्म नक्षत्र कैसे पता करें?
ऊपर तीन चीज़ें भरिए — जन्म की तारीख़, जन्म का समय, और जन्म का शहर। उसी क्षण का नक्षत्र, तिथि, योग, करण और चंद्र राशि नीचे आ जाएँगे। ध्यान रहे कि जन्म का समय सही होना चाहिए; नक्षत्र दिन में बदलता है, इसलिए आधे घंटे का अंतर भी नक्षत्र बदल सकता है। जन्म प्रमाणपत्र या अस्पताल के रिकॉर्ड का समय सबसे भरोसेमंद होता है।
क्या पुरानी तारीख़ का भी पंचांग निकल सकता है?
हाँ। तारीख़ बदलकर कोई भी दिन डालिए — दशकों पहले का या आगे का। गणना खगोलीय सूत्रों से होती है, किसी छपी तालिका से नहीं, इसलिए उसकी कोई सीमा नहीं है।
क्या इससे कुंडली बन जाएगी?
नहीं। यह पंचांग के आँकड़े देता है — तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राशि। कुंडली में इसके अलावा नौ ग्रहों की स्थिति, बारह भाव, दशा-अंतर्दशा और कई गणनाएँ आती हैं। यहाँ जो मिलता है वह कुंडली का एक हिस्सा है, पूरी कुंडली नहीं।
आगे पढ़ें
- हिंदू पंचांग 2026–2027: पूरा कैलेंडर और तारीख़ बदलने का तर्क
- नवरात्रि 2026: नौ देवियाँ, नौ दिन
- मंत्र का विज्ञान
- सभी लेख
हर पर्व से पहले उसकी कथा — Instagram पर
पंचांग यहाँ, कथा वहाँ। @bhaktimargtalesai पर हर बड़े पर्व से पहले उसकी पूरी कथा और उसका कारण।
Dharma & Mind