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पंचांग · 2026–2027

हिंदू पंचांग 2026–2027: तिथि, त्योहार और कैलेंडर — तर्क के साथ

राहुल सिंह तोमर · 13 अक्टूबर 2026 · लखनऊ · पढ़ने का समय ~11 मिनट

तारीख़ें हर जगह मिल जाती हैं। जो नहीं मिलता वह यह है — तिथि असल में होती क्या है, दिवाली हर साल जगह क्यों बदलती है, और दो पंचांग एक ही त्योहार की दो तारीख़ें क्यों बताते हैं।

पहले कैलेंडर, फिर उसके पीछे की पूरी मशीन।

दो कैलेंडर, साथ-साथ

यह एक चित्र पूरी पहेली सुलझा देता है। ऊपर अंग्रेज़ी महीने हैं, नीचे हिंदू महीने — और ध्यान दीजिए कि कोई भी हिंदू महीना किसी अंग्रेज़ी महीने के साथ शुरू नहीं होता।

अंग्रेज़ी महीने (सौर) जन फ़र मार्च अप्रैल मई जून जुल अग सित अक्तू नव दिस हिंदू महीने (चांद्र) — आधे महीने आगे खिसके हुए माघ फाल्गुन चैत्र वैशाख ज्येष्ठ आषाढ़ श्रावण भाद्रपद आश्विन कार्तिक मार्गशीर्ष पौष पौष मकर संक्रांति महाशिवरात्रि होली राम नवमी रक्षा बंधन जन्माष्टमी नवरात्रि दिवाली हर हिंदू महीना अंग्रेज़ी महीने के बीच से शुरू होता है — इसीलिए त्योहार की तारीख़ हर साल बदलती है।

हर हिंदू महीना अंग्रेज़ी महीने के लगभग बीच से शुरू होकर अगले के बीच तक चलता है। दोनों कभी मेल नहीं खाते, क्योंकि दोनों अलग-अलग चीज़ गिनते हैं — एक सूर्य, दूसरा चंद्रमा।

पंचांग का अर्थ ही पाँच अंग है

ज़्यादातर लोग पंचांग को त्योहारों की सूची समझते हैं। वह नाम ही कुछ और कहता है — पंच + अंग, यानी पाँच अंग। किसी भी दिन को पूरी तरह दर्ज करने के लिए पाँच चीज़ें चाहिए:

अंगक्या मापता हैकुल
तिथिचंद्रमा और सूर्य के बीच का कोण — 12° का एक खंड30 तिथि = एक चांद्र मास
वारसप्ताह का दिन7 — रवि से शनि
नक्षत्रचंद्रमा उस समय किस तारा-समूह में है27 नक्षत्र
योगसूर्य और चंद्र के देशांतर का जोड़27 योग
करणआधी तिथि11 करण

यह एक पाँच-स्तंभों वाली समय-प्रणाली है। आज की भाषा में कहें तो किसी क्षण का पूरा address — तारीख़ अकेली उसका एक हिस्सा भर है।

असली बात

तिथि दिन नहीं है — तिथि एक कोण है

यह एक वाक्य समझ लीजिए तो आधा पंचांग खुल जाता है।

12°चंद्र का सूर्य से आगे निकलना = एक तिथि
30तिथियाँ एक चांद्र मास में (360° ÷ 12°)
20–26घंटे — एक तिथि की लंबाई इतनी बदलती है

जब चंद्रमा सूर्य से ठीक 12 डिग्री आगे निकल जाता है, तब एक तिथि पूरी हुई। पूरा वृत्त 360° का है, इसलिए हर चांद्र मास में ठीक 30 तिथियाँ।

अब असल पेच — चंद्रमा की गति एक समान नहीं है। कभी वह 12° जल्दी तय कर लेता है, कभी देर से। इसलिए कोई तिथि 20 घंटे की होती है और कोई 26 घंटे की।

और यहीं से वह बात निकलती है जो लोगों को उलझाती है: अगर कोई तिथि छोटी पड़ गई और दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर ख़त्म हो गई, तो वह तिथि क्षय हो जाती है — कैलेंडर से ग़ायब। और अगर लंबी हो गई और दो सूर्योदय देख ले, तो वह वृद्धि हो जाती है — लगातार दो दिन वही तिथि।

इसे आप ऐसे भी देख सकते हैं: हमारा कैलेंडर दिन नहीं गिनता, वह आकाश की स्थिति गिनता है। दिन तो उसका अनुवाद भर है।

तारीख़ हर साल क्यों बदलती है

अब दिवाली वाला सवाल। उत्तर गणित में है, रहस्य में नहीं।

वर्षलंबाईकिस पर आधारित
चांद्र वर्ष≈ 354 दिन12 चंद्र-चक्र
सौर वर्ष≈ 365.24 दिनपृथ्वी की सूर्य-परिक्रमा
अंतर≈ 11 दिन हर सालयही पूरी गुत्थी है

हर साल चांद्र कैलेंडर सौर कैलेंडर से लगभग 11 दिन पीछे खिसक जाता है। इसीलिए एक ही त्योहार कभी अक्टूबर में आता है, कभी नवंबर में।

तो फिर दिवाली गर्मियों में क्यों नहीं पहुँच जाती?

यही सबसे सुंदर हिस्सा है। अगर 11 दिन का अंतर यूँ ही जुड़ता रहे, तो लगभग 16 साल में दिवाली आधा साल खिसक जाएगी — यानी गर्मियों में।

इसे रोकने के लिए एक सुधार बनाया गया: अधिक मास, जिसे मलमास भी कहते हैं। औसतन हर 32.5 महीने में — लगभग हर 2.7 साल में — कैलेंडर में एक पूरा अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है।

और जोड़ने का नियम मनमाना नहीं है। सूर्य हर महीने एक राशि बदलता है, जिसे संक्रांति कहते हैं। जिस चांद्र मास में एक भी संक्रांति नहीं पड़ती, वही अधिक मास घोषित हो जाता है।

इसे आप ऐसे भी देख सकते हैं — यह एक leap year जैसा सुधार है, पर कहीं अधिक चतुर। leap year में एक दिन जोड़ा जाता है, यहाँ पूरा महीना जोड़ा जाता है, और कौन सा महीना जोड़ना है यह सूर्य की स्थिति स्वयं तय कर देती है। किसी को तय नहीं करना पड़ता।

दो पंचांग अलग तारीख़ क्यों बताते हैं

यह सवाल हर साल उठता है, और इसका उत्तर कोई साफ़-साफ़ नहीं देता। इसलिए मैं सीधे कहता हूँ — यह ग़लती नहीं है। तीन कारण हैं:

कारणक्या होता है
1. सूर्योदयतिथि सूर्योदय के समय देखी जाती है। लखनऊ और मुंबई में सूर्योदय अलग समय पर होता है — तिथि का कटाव बदल जाता है।
2. अमांत बनाम पूर्णिमांतदक्षिण-पश्चिम भारत में महीना अमावस्या पर ख़त्म होता है, उत्तर भारत में पूर्णिमा पर। तिथि वही रहती है, महीने का नाम बदल जाता है।
3. व्याप्ति-नियमतिथि किस समय-खंड में हो तो त्योहार उस दिन माना जाए — इसके नियम सम्प्रदाय के अनुसार अलग हैं।

एक जीवित उदाहरण, इसी पेज से। 2026 की गोवर्धन पूजा और भाई दूज पर मैंने तीन पंचांग मिलाए — उनमें एक दिन का अंतर निकला। मैंने नीचे की तालिका में वही अंतर वैसा ही छोड़ दिया है, एक तारीख़ चुनकर बाक़ी छिपाई नहीं।

क्योंकि असली जानकारी यही है: जहाँ पंचांग बँटे हुए हैं, वहाँ आपको बँटाव दिखना चाहिए — एक झूठी निश्चितता नहीं।

कैलेंडर — शेष 2026

तारीख़दिनत्योहारतिथि
25 अक्टूबरशनि/रविशरद पूर्णिमाआश्विन शुक्ल पूर्णिमा
29 अक्टूबरगुरुवारकरवा चौथकार्तिक कृष्ण चतुर्थी
6 नवंबरशुक्रवारधनतेरसकार्तिक कृष्ण त्रयोदशी
8 नवंबररविवारदिवाली · लक्ष्मी पूजाकार्तिक अमावस्या
9–10 नवंबर—गोवर्धन पूजाकार्तिक शुक्ल प्रतिपदा
10–11 नवंबर—भाई दूजकार्तिक शुक्ल द्वितीया
15 नवंबररविवारछठ पूजाकार्तिक शुक्ल षष्ठी

कैलेंडर — पूरा 2027

तारीख़दिनत्योहारतिथि
15 जनवरीशुक्रवारमकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
11 फ़रवरीगुरुवारवसंत पंचमीमाघ शुक्ल पंचमी
6 मार्चशनिवारमहाशिवरात्रिफाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी
22 मार्चसोमवारहोलिका दहनफाल्गुन पूर्णिमा
23 मार्चमंगलवारहोलीचैत्र कृष्ण प्रतिपदा
7 अप्रैलबुधवारचैत्र नवरात्रि आरंभचैत्र शुक्ल प्रतिपदा
15 अप्रैलगुरुवारराम नवमीचैत्र शुक्ल नवमी
20 अप्रैलमंगलवारहनुमान जयंतीचैत्र पूर्णिमा
9 मईरविवारअक्षय तृतीयावैशाख शुक्ल तृतीया
18 जुलाईरविवारगुरु पूर्णिमाआषाढ़ पूर्णिमा
17 अगस्तमंगलवाररक्षा बंधनश्रावण पूर्णिमा
25 अगस्तबुधवारकृष्ण जन्माष्टमीभाद्रपद कृष्ण अष्टमी
4 सितंबरशनिवारगणेश चतुर्थीभाद्रपद शुक्ल चतुर्थी
30 सितंबरगुरुवारशारदीय नवरात्रि आरंभआश्विन शुक्ल प्रतिपदा
9 अक्टूबरशनिवारदशहरा · विजयादशमीआश्विन शुक्ल दशमी
18 अक्टूबरसोमवारकरवा चौथकार्तिक कृष्ण चतुर्थी
27 अक्टूबरबुधवारधनतेरसकार्तिक कृष्ण त्रयोदशी
29 अक्टूबरशुक्रवारदिवाली · लक्ष्मी पूजाकार्तिक अमावस्या
30 अक्टूबरशनिवारगोवर्धन पूजाकार्तिक शुक्ल प्रतिपदा
31 अक्टूबररविवारभाई दूजकार्तिक शुक्ल द्वितीया
4 नवंबरगुरुवारछठ पूजाकार्तिक शुक्ल षष्ठी

कैसे बनी यह तालिका: हर तारीख़ तीन स्वतंत्र पंचांग स्रोतों से मिलाई गई है और वही दी गई है जिस पर कम से कम दो सहमत थे। जहाँ मतभेद था, वह खुलकर लिखा गया है। तिथियाँ भारत (दिल्ली) के सूर्योदय पर आधारित हैं। पूजा का मुहूर्त जानबूझकर नहीं दिया गया — वह मिनटों का हिसाब है और हर शहर में बदलता है; उसके लिए अपने स्थानीय पंचांग या पुरोहित से पुष्टि करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग का अर्थ क्या है?

पंचांग = पंच + अंग, यानी पाँच अंग। ये पाँच हैं — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। किसी भी दिन को पूरी तरह बताने के लिए पंचांग इन्हीं पाँच का हिसाब देता है। यह केवल त्योहारों की सूची नहीं, समय मापने की एक पूरी प्रणाली है।

तिथि असल में क्या होती है?

तिथि दिन नहीं, कोण है। जब चंद्रमा सूर्य से 12 डिग्री आगे निकल जाता है, तब एक तिथि पूरी होती है। पूरा वृत्त 360 डिग्री का है, इसलिए एक चांद्र मास में ठीक 30 तिथियाँ होती हैं। चंद्रमा की गति एक समान नहीं होती, इसलिए कोई तिथि 20 घंटे की हो सकती है और कोई 26 घंटे की — यही कारण है कि कभी एक तिथि दो दिन चलती है और कभी एक तिथि पूरी तरह छूट जाती है।

त्योहार की तारीख़ हर साल क्यों बदल जाती है?

क्योंकि हिंदू कैलेंडर चंद्रमा से चलता है और अंग्रेज़ी कैलेंडर सूर्य से। चांद्र वर्ष लगभग 354 दिन का होता है और सौर वर्ष लगभग 365.24 दिन का — हर साल लगभग 11 दिन का अंतर पड़ जाता है। इसीलिए दिवाली कभी अक्टूबर में आती है, कभी नवंबर में।

अधिक मास क्या है और क्यों आता है?

अगर 11 दिन का अंतर यूँ ही बढ़ता रहे तो कुछ वर्षों में दिवाली गर्मियों में आ जाएगी। इसे रोकने के लिए औसतन हर 32.5 महीने में, यानी लगभग हर 2.7 साल में, एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है — अधिक मास या मलमास। नियम यह है: जिस चांद्र मास में सूर्य की कोई संक्रांति नहीं पड़ती, वही अधिक मास कहलाता है।

दो पंचांग अलग-अलग तारीख़ क्यों बताते हैं?

तीन कारणों से। पहला — तिथि सूर्योदय के समय देखी जाती है, और सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है। दूसरा — कुछ परंपराएँ अमांत मास मानती हैं (अमावस्या पर महीना ख़त्म) और कुछ पूर्णिमांत (पूर्णिमा पर)। तीसरा — त्योहार किस समय-खंड में पड़ने पर मान्य होगा, इसके नियम सम्प्रदाय के अनुसार अलग हैं। इसलिए एक-दो दिन का अंतर सामान्य है, ग़लती नहीं।

दिवाली 2026 कब है?

दिवाली और लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर 2026, रविवार को है — कार्तिक अमावस्या। धनतेरस 6 नवंबर और छठ पूजा 15 नवंबर को है। पूजा का सही समय हर शहर में अलग होता है, इसलिए अपने स्थानीय पंचांग से मिलान कर लें।

दिवाली 2027 कब है?

दिवाली 29 अक्टूबर 2027, शुक्रवार को है। धनतेरस 27 अक्टूबर, गोवर्धन पूजा 30 अक्टूबर, भाई दूज 31 अक्टूबर और छठ पूजा 4 नवंबर को है।

अमांत और पूर्णिमांत में क्या अंतर है?

दोनों में महीने की शुरुआत अलग मानी जाती है। अमांत परंपरा में महीना अमावस्या पर ख़त्म होता है — यह दक्षिण और पश्चिम भारत में चलती है। पूर्णिमांत में महीना पूर्णिमा पर ख़त्म होता है — यह उत्तर भारत में चलती है। तिथि दोनों में एक ही रहती है, बस महीने का नाम बदल जाता है, इसलिए एक ही त्योहार दो अलग महीनों के नाम से बताया जा सकता है।


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